नई दिल्ली। चीन के एक विद्वान ने कहा है कि चीन में प्री-स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक के पाठ्यक्रमों में महात्मा गांधी की शिक्षाएं शामिल हैं, इस वजह से गांधी की शिक्षा और उनके अहिंसा आंदोलन को लेकर चीन में लोगों की रुचि बढ़ रही है।
भारतीय राजनयिक पीए नजारेथ की किताब ‘गांधीज आउटस्टैंडिग लीडरशिप’ का चीनी भाषा में अनुवाद करने वाले क्वानयू शांग ने कहा कि चीन में कई अलग-अलग स्तरों पर गांधी के विषय में पढ़ाया जा रहा है।
शांग ने कहा कि पहले केवल चीनी विद्वान गांधी के बारे में जानते थे लेकिन आज चीन में अधिक से अधिक लोग स्वतंत्रता संग्राम के दौरान किए गए उनके आंदोलन के बारे में जानकारी रखते हैं। लोग उनकी अहिंसा संबंधी शिक्षाओं में रुचि रखते हैं।
साउथ चिंग नॉर्मल विश्वविद्यालय में विदेश अध्ययन विभाग के प्रोफेसर ने कहा कि चीन में प्री-स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक पाठ्यक्रम में गांधी की शिक्षाएं शामिल हैं जिससे किसी न किसी रूप में चीन में हर कोई गांधी के बारे में पढ़ता है।
उन्होंने कहा कि प्री-स्कूल में बच्चों के लिए गांधी की शिक्षाएं चित्रकला के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं। माध्यमिक विद्यालय में युद्ध इतिहास की पढ़ाई होती है, उसमें गांधी के अहिंसा आंदोलन पर कम से कम एक अध्याय रखा गया है।
शांग ने कहा कि गांधी पर व्याख्यान देने के लिए मुझे बीजिंग विश्वविद्यालय ने एक बार आमंत्रित किया था। गांधी की शिक्षाओं को लेकर प्रतिभागियों की संख्या अभूतपूर्व रूप से बढ़ रही है।
शांग यहां नजारेथ की किताब के चीनी संस्करण के विमोचन के लिए आए थे। मूल किताब पहली बार वर्ष 2009 में अंग्रेजी में प्रकाशित हुई थी जिसे बाद में कन्नड़, हिन्दी, तमिल, तेलुगु, उड़िया और स्पेनिश भाषाओं में अनुवादित किया गया।
यह पूछे जाने पर की कि क्या किसी भारतीय नेता पर लिखी किताब को चीन में अच्छी प्रतिक्रिया मिलेगी? शांग ने कहा कि चीन में पहले ही गांधी के ऊपर बहुत सारी किताबें प्रकाशित की जा चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि और यह किताब चीन के लिए नैतिक दिशा देने वाली होगी और इससे चीनियों में नेतृत्व गुणों को लेकर नई सोच आएगी। (भाषा)