Sunday, October 6, 2013

आधार कार्ड :

नई दिल्ली। तीन पेट्रोलियम कंपनियों ने आधार कार्ड मामले में उच्चतम न्यायालय का रुख किया है। पेट्रोलियम कंपनियों ने उच्चतम न्यायालय से आधार कार्ड मामले में उसके पहले के आदेश में सुधार करने का आग्रह किया है।

उच्चतम न्यायालय ने पहले जारी अपने आदेश में कहा है कि आधार कार्ड नहीं होने की वजह से किसी भी व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से वंचित नहीं रखा जा सकता।

पेट्रोलियम पदार्थों का विपणन करने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल सोमवार को मुख्य न्यायाधीश पी. सदाशिवम और न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की पीठ के समक्ष अविलंब सुनवाई के लिए अपना अनुरोध रखेंगी।

पीठ इससे पहले पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की इसी तरह की याचिका की सुनवाई की तारीख 8 अक्टूबर तय कर चुकी है।

सरकारी कंपनियों की वकील खुशबू जैन ने कहा कि अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल नागेश्वर राव पीठ के सामने अपना पक्ष रखेंगी। कंपनियों के अनुसार आधार कार्ड के बारे में न्यायालय के आदेश से उन लोगों के मन में गंभीर संदेह पैदा हो गया जिन्होंने एलपीजी सिलेंडर के लिए प्रत्यक्ष नकदी अंतरण (डीबीटीएल) पाने के लिए आधार कार्ड नंबर दर्ज कराया है।

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने कहा कि डीबीटीएल लागू किया जा चुका है और यह 54 जिलों में सफलता से काम कर रहा है। सब्सिडी की पुरानी प्रणाली बंद कर दी गई है। कंपनियां अन्य 235 जिलों में योजना लागू करने की प्रक्रिया में हैं।

इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने मंत्रालय की याचिका पर 8 अक्टूबर को सुनवाई की सहमति दी। मंत्रालय ने डीबीटीएल योजना को जारी रखने के आदेश में परिवर्तन या स्पष्टीकरण की मांग की थी। फिलहाल डीबीटीएल योजना के तहत सिर्फ उसी व्यक्ति का फायदा मिल सकता है जिसके पास आधार कार्ड हो।

केंद्र ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए आधार कार्ड पर पूर्व में दिए गए उस आदेश में बदलाव करने की मांग की है जिसमें शीर्ष अदालत ने कहा था कि आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है और किसी भी व्यक्ति को इस आधार पर किसी सरकारी योजना से वंचित नहीं किया जा सकता।

उच्चतम न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी. सदाशिवम की पीठ ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र की याचिका पर 8 अक्टूबर को सुनवाई होगी।

केंद्र की ओर से उपस्थित होते हुए सॉलिसिटर जनरल मोहन पाराशरन ने कहा कि हम उस आदेश में बदलाव की मांग कर रहे हैं जिसमें कहा गया है कि आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यह आदेश कई कल्याण योजनाओं के मार्ग में आड़े आ सकता है।

इससे पहले, उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकार (यूआईडीएआई) द्वारा जारी आधार कार्ड किसी सरकारी सेवा को प्राप्त करने के लिए अनिवार्य नहीं है और किसी भी व्यक्ति को कार्ड नहीं होने के चलते ऐसी सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता है।

शीर्ष अदालत ने केंद्र से यह कार्ड अवैध प्रवासियों को जारी नहीं करने को कहा था, क्योंकि वे इसका इस्तेमाल अपने प्रवास को वैध बनाने के लिए कर सकते हैं। केंद्र ने अदालत को बताया था कि आधार कार्ड वैकल्पिक है और उसे नागरिकों के लिए अनिवार्य नहीं बनाया गया है।

शीर्ष अदालत ने कुछ राज्यों में वेतन, पीएफ, विवाह एवं संपत्ति पंजीकरण जैसे कार्यों के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य बनाए जाने के निर्णय के खिलाफ कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया था।

याचिकाकर्ताओं की दलील है कि यह योजना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन एवं स्वतंत्रता का अधिकार) जैसे मौलिक अधिकारों के खिलाफ है और सरकार हालांकि इसे स्वैच्छिक होने का दावा करती है, लेकिन ऐसा नहीं है।

(भाषा)

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