Friday, April 22, 2011

भ्रष्टाचार पर जनता के सब्र का बांध टूटा: पीएम


नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। लोकपाल विधेयक पर कांग्रेस के तमाम सूरमा जहां सिविल सोसाइटी के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, वहीं सरकार और संगठन का शीर्ष नेतृत्व इस मुद्दे पर पूरी गंभीरता दर्शा रहा है। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सिविल सोसाइटी से बड़ी लकीर खींचने की कोशिश के तहत प्रधानमंत्री ने देश के वरिष्ठ नौकरशाहों के बीच लोकपाल विधेयक संसद के अगले सत्र में पेश करने की उम्मीद जताई। सिविल सर्विस दिवस पर वरिष्ठ नौकरशाहों के बीच प्रधानमंत्री ने चेतावनी भी दी कि अब भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता के सब्र का बांध टूट गया है। सरकार इससे सख्ती के साथ निपटने के लिए प्रतिबद्ध है, क्योंकि जनता तुरंत कार्रवाई चाहती है।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के अन्ना हजारे को पत्र लिखकर भ्रष्टाचार से कोई भी समझौता न करने और लोकपाल विधेयक लाने पर प्रतिबद्धता जताने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उसी लाइन को और आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि 'हम इस बात को पहचानें कि जनता अब भ्रष्टाचार केमौजूदा मौहाल को कतई बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है। जनता इसके खिलाफ फौरी और सख्त कार्रवाई चाहती है और उसकी अपेक्षा बिल्कुल जायज है।' उन्होंने भ्रष्टाचार को बड़ी चुनौती बताते हुए कहा हमें निडरता से इसका मुकाबला करना है।
देश के वरिष्ठ नौकरशाहों से सिंह ने कहा कि 'मैं आपसे उम्मीद करता हूं कि अपने उच्च अधिकारियों, खासतौर पर राजनीतिक नेतृत्व को आप ईमानदार और बेखौफ सलाह देंगे। सरकार का लक्ष्य भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए विधायी ढांचे को मजबूत करना, प्रशासनिक ढांचे को चुस्त-दुरुस्त बनाना और प्रक्रियात्मक पहलुओं को रफ्तार देने का है।' उन्होंने याद दिलाया कि इसी उद्देश्य के लिए मंत्रियों का एक समूह जरूरी सलाह-मशविरा भी कर रहा है। जल्द ही इसकी सिफारिशें मिल जाने की उम्मीद है।
इस मौके पर प्रधानमंत्री ने यह भी एलान किया कि सरकार शीघ्र ही भ्रष्टाचार के बारे में संयुक्त राष्ट्र संधि पर हस्ताक्षर करने जा रही है। सरकार सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता लाने को प्रतिबद्ध है। लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने वाली संयुक्त समिति गठित का जिक्र करते हुए उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाए गए सरकार के कदमों को भी गिनाया। उन्होंने कहा कि न्यायिक जवाबदेही और गड़बड़ियों का भंडाफोड़ करने वालाें को सुरक्षा प्रदान करने संबंधी विधेयकों को संसद में पहले ही पेश किया जा चुका है।

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