चंडीगढ़, शनिवार, 23 अप्रैल 2011( 18:25 IST )
लोकपाल विधेयक प्रारूप समिति में नागरिक समाज के प्रतिनिधियों में कुछ के विवादों के घेरे में आने के बीच पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने शनिवार को कहा कि मीडिया समेत सभी नागरिकों की यह सुनिश्चित करने जिम्मेदारी है कि इस समय आरोप कामयाब न हो बल्कि सच्चाई और ईमानदारी की जीत हो।
भ्रष्टाचार के खिलाफ गाँधीवादी नेता अण्णा हजारे की मुहिम में अग्रणी रहीं बेदी ने एक कार्यक्रम के अवसर पर कहा कि सच्चाई और ईमानदारी जीतनी चाहिए। इस समय आरोप कामयाब न हो और यह सुनिश्चित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने मीडिया पर यह जिम्मेदारी डाल दी कि इस समय किन चीजों को प्रमुखता दी जानी चाहिए।
देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी ने कहा कि यह आपको तय करना है कि किसके झूठ को आप हेडलाइन बनाना चाहते हैं और किसकी बात को आप हेडलाइन नहीं बनाना चाहते। आप अखबार में किसको स्थान देना चाहते या किसको स्थान नहीं देना चाहते। समझने का प्रयास कीजिए कि मैं क्या कहने का प्रयास कर रही हूँ। वे लोकपाल विधेयक प्रारूप समिति के कुछ नागरिक सदस्यों पर विवादों के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब दे रही थीं।
वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी के इस बयान पर कि सरकार कठोर भ्रष्टाचार निरोधक कानून बनाने को लेकर आशान्वित हैं, बेदी ने कहा कि यह बहुत राहत की बात है। उधर, मुखर्जी के इस बयान के बाद कर्नाटक के लोकायुक्त संतोष हेगड़े ने लोकपाल विधेयक संयुक्त प्रारूप समिति से इस्तीफा नहीं देने का संकेत दिया है।
एक सवाल के जवाब में पूर्व आईपीएस अधिकारी ने कहा कि यदि हम एक ही दिशा में आगे बढ़ते रहते हैं और हम दिशा से नहीं भटकते हैं तो मैं मानती हूँ कि विधेयक समय पर तैयार हो जाना चाहिए। यही कारण है कि मैं यह कहती रही हूँ कि हमें यह बात दिमाग में रखनी चाहिए या समझनी चाहिए कि किन बातों को प्रमुखता दी जाए और किन्हें नहीं।
उन्होंने कहा कि समझने की बात यह है कि यह लोकपाल कानून अण्णा हजारे या भूषणद्वय के लिए नहीं बल्कि हरेक नागरिक के लिए आ रहा है। पिछले एक साल से भूषणद्वय, न्यायमूर्ति हेगड़े और अरविंद केजरीवाल इससे जुडे रहें हैं। उन्होंने कई बैठकें, कार्यशालाएँ और संगोष्ठियाँ कीं और लोगों से सुझाव माँगे। हालाँकि बेदी ने स्पष्ट किया कि यह प्रारूप अंतिम या बंद दस्तावेज नहीं है।
(भाषा)
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