Sunday, May 13, 2012

संसद के प्रभुत्व को पुन: स्थापित किया जाए-अंसारी


संसद के प्रभुत्व को पुन:स्थापित करने की जरूरत बताते हुए उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने रविवार को कहा कि कार्यपालिका की जवाबदेही और निगरानी तथा विचार-विमर्श और कानून बनाने के लिहाज से क्षमता में गिरावट की प्रवृत्ति नजर आ रही है। 

अंसारी ने संसद की 60वीं वर्षगांठ के मौके पर संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में आयोजित दोनों सदनों की विशेष संयुक्त बैठक में कहा- 60 वर्षों का यह समय संसद के कामकाज के दो अति महत्वपूर्ण क्षेत्रों, कार्यपालिका की जवाबदेही और निगरानी सुनिश्चित करना, और विचार-विमर्श एवं कानून निर्माण में इसके कार्य निष्पादन का आकलन करने के लिए अनुकूल समय है। 

उन्होंने कहा कि इन दोनों ही क्षेत्रों में क्षमता के स्तर गिरावट की प्रवृत्ति दिख रही है। जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत व्यवस्थाओं का उपयोग कम किया जा रहा है। संसद के कार्यदिवसों में स्पष्ट रूप से गिरावट दिख रही है। विचार-विमर्श अब कम होता है और कई मौकों पर कानून बनाने का काम जल्दबाजी में संपन्न हो जाता है।

अंसारी ने कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर पर हम जवाहरलाल नेहरू द्वारा व्यक्त इस उद्‍गार से सामूहिक संकल्प लें कि ‘संसद के प्रभुत्व’ को पुन: स्थापित किया जाए।
(भाषा)

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